Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookकमलापुर गांव में आज पहले पहल घरघराता हुवा (बिमान) हवाई जहाज़ आया। एक कौतुहल मच गया। अकस्मात हवाई जहाज़ में आग लग गई। एक खौफनाक आवाज के साथ जहाज़ गिर पड़ा। सारे गाँव के लोग जमा हो गये। गांव का मुखिया खुशालचंद घायलों को बचाकर अपने घर ले गया। खुशालचंद की एक लड़की थी कमला। गांव के एक डाक्टर दुनीचंद की देख रेख में इलाज होने लगा। किसी जरुरी काम से खुशालचंद को गांव से बाहर जाना पड़ा और उसकी जगह घायलों की देखभाल का काम कमलाने सँभाल लिया। कमला के भावी पति थे डा. दुनीचंद। दोनों ने मिलकर घायल फौजी अफसरों की सेवा की। कमला को दुनीचंद से शादी करना मंजूर न था पर वह कुछ कह सकती न थी-पिता की इच्छा। कमला गाना गाने की शैकीन थी। उसकी एक सखी गंगू थी। शीतल कमला की सेवाओं से मुग्ध हो गया था साथ ही शीतल कमला के गाने पर भी मुग्ध हो चुका था। दो युवक दिलों के इस आकर्षणने एक दूसरे के दिलों में प्रेम का भी संचार कर दिया-और कुछ भी न कहते हुए एक दिन एक दूसरे से सब कुछ कह गये।
रेडिओ द्वारा सूचना मिलने पर सहायक जहाज आया-युद्ध अपनी भीषण विकरालता का रूप धारण किये था-दुश्मन ने देश पर आक्रमण कर दिया था-शीतल व दिलीप को युद्ध पर जाना ही होगा-यह जानकर कमला व गंगू को बड़ा दुःख हुआ। पर कर्म से बिमुख कैसे हो सकते थे-शीतलने आश्वासन दिया और कमला से वापस मिलने का वादा किया पर युद्ध के वीरों के ऐसे आश्वासन कब किसी को शान्त कर सकते थे। देखते-देखते हवाई जहाज़ आकाश में विलीन हो गया। गंगू और कमला दिल में एक याद लेकर रह गये। डा. दुनीचन्दने अच्छी तरह सारे रहस्य को देखा और समझा। खुशालचंद के आने पर उसने फ़ौरन विवाह की इच्छा प्रकट की। कमलाने अपने अंधगुरू हरीबाबा से सहायता और आश्रय की भीख माँगी। हरिबाबा के समझाने पर भी खुशालचंदने विवाह तय कर दिया। परीणाम-स्वरूप अंधगुरु और कमला एक रात घर से लापता हो गए। दिलीपने कमला के पास शीतल के पत्र न पहुँचने दिए।
शीतलकी निराशा बढ़ती गई। शीतलने समझा बेचारी कमला की शादी डा. दुनीचन्दसे करदी गई होगी। इस आघात को वह कैसे सहन कर सकता था अस्तु वह लड़ाई के भभकते मैदान की ओर रवाना हुआ। हरीबाबा और कमला एक नृत्य-मण्डल की मदद से शीतल की छावनी तक पहुंचे। आफिसरने कमला को पहचान लिया, लेकिन शीतल तो युद्ध के मैदान में जा चुका था। कुछ दिनों बाद शीतल सफलता पूर्वक डेरे पर वापस आया, पर घायल के रूप में। कमलाने देखा शीतलको और शीतलने देखा कमलाको, पर शीतल उसे पहचान न सका।
शीतलका रोग एकसमस्या बन गया। डॉक्टरने कहा रोगी की हालत ख़तरनाक है...कमलाको एक आघात पहुंचा-फिर... ... आगे क्या हुआ? पर्दे पर देखिए।
[From the official press booklets]