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अमीरी और ग़रीबी के दरमियान जो सदियों से दीवार खड़ी थी, वो अब भी खड़ी रहेगी।
बहुत नौजवान इसे फलांग कर अपने प्यार में काम्याब हो जाते हैं और बहुतों को अपने जीवन की आहुती देनी पड़ती है।
कमसिन क़ैदी चन्द्र मोहन को बौस्टल स्कूल में लाकर रख्खा जाता है, जहाँ और भी कमसिन कै़दी हैं। उस पर इलज़ाम है अपने बाप के क़त्ल का। आते ही चन्द्र मोहन की दूसरी क़ैदियों से मुड़ भेड़ हो जाती है। स्कूल का असिस्टेंट सूपारिन्टेन्डे़न्ट सुशील कुमार चन्द्र मोहन पर ज़ुम्म ढाता है और दूसरे लड़कों को चोरियाँ करने बाहर भेजता है।
स्कूल की सूपारिन्टेन्डे़न्ट औरत है जो चन्द्र मोहन के हक़ जें जाती है।
एक दिन नीलिका (हीरोईन), अमीर और मग़रूर बाप कस्तूरी प्रसाद (हीरो) से मिलने स्कूल में आती है। उसे मिलने से रोका जाता है। चन्द्र मोहन बेताब होकर उसके पीछे भागता है। कस्तूरी प्रसाद के ग़ंुडे चन्द्र मोहन को मार पीट कर, नीलिमा को वैन बिठाकर ले जाते है।
प्रभावती के पूछने पर चन्द्र मोहन अपनी दुःख भरी कहानी सुनाता है।
चन्द्र मोहन कस्तूरी प्रसाद के घर में एक क्लर्क है, नीलिमा उसके प्यार में गिरफ़्तार हो जाती है।
कस्तूरी प्रसाद चन्द्र मोहन को क़त्ल करने के लिए अपने चम्चे भगवान दास और दूसरे गंुंडों को भेजता है। मारा जाता है बेचारा चन्द्र मोहन का बाप सूरज नाथ और अलज़ाम लग जाता है चन्द्र मोहन पर।
प्रभावती चन्द्र मोहन को दिलासा देती है कि वो उस शादी नीलिमा से ज़रूर करवा देगी।
कस्तूरी प्रसाद प्रभावती से बदला लेने के लिए उसकी शादी अपनी बेटी नीलिमा से कर देगा। और उसे स्मगलिंग के इलज़ाम में गिरफ़्तार करवा देता है। जब प्रभावीत अपने ही बेटे को बौस्टल स्कूल में क़ैदी के रूप में देखती है तो उस पर ग़म का पहाड़ टूट पड़ता है। कहानी का एक मोड़ ऐसा आ जाता है, कि उसे अपनी नौकरी से इस्तिफ़ा देना पड़़ता है प्रभावती चन्द्र मोहन की शादी नीलिमा से करवाने में काम्याद हुई या नहीं.............
कस्तूरी प्रसाद का क्या हुआ............
ये जानने के लिए सुरेश प्रोडक्शन्स की मिसाली तस्वीर "प्रेम कैदी" आप सबको ज़रूर देखनी होगी।
(From the official press booklet)