Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookमुसीबत आती है तो चारों तरफ़ से.............
कमला की ज़िन्दगी में भी ऐसे ही तूफ़ान आते हैं। वह गाँववालों से तंग आकर माँ के मरने के बाद गाँव छोड़कर भागती है। ट्रेन में उसकी मुलाक़ात प्राण नाम के आदमी से होती है। उसकी मीठी-मीठी बातों को सुनकर कमला समझती है कि ये इन्सान के रूप में देवता है। वह उसके ही साथ बाम्बे आ जाती है, लेकिन जब प्राण कमला के ऊपर बलात्कार करने की कोशिश करता तब कमला समझती है कि यह इन्सान के रूप में शैतान है। कमला अपनी इज्जत बचाने के लिये हर कोशिश करती है और अन्त में उसे प्राण की प्रेमिका श्यामा की मदद किल जाती है। कमला मौका देखकर भाग जाती है। एकाएक मशहूर बैरिस्टर अशोक बाबू की गाड़ी से टकरा जाती है। अशोक बाबू उसे अपने घर लाकर दवा वगैरह का बन्दोबस्त करते हैं। धीरे-धीरे कमला ठीक हो जाती है। इस अरसे में अशोक का लड़का रमेश कमला से काफ़ी हिलमिल जाता है और उसे किसी भी हालत में छोड़ना नहीं चाहता। अशोक बाबू कमला को समझाते हैं और उसके यक़ीन के लिए कमला को अपनी जीवनसंगिनी लेते हैं। शादी की पार्टी में प्राण कमला को देखकर हैरान हो जाता है लेकिन यह सोचता है कि उसक हाथ से निकल कर भी कमला उसके जाल में ही है।
और उसका तीर निशाने पर लगा। भाभी मौक़ा पाकर अशोक के दूध में ज़हर मिला देती है लेकिन दूध अशोक का बच्चा रमेश पी जाता है और उसकी जीवन लीला खत्म हो जाती है। अशोक बच्चे की मौत का कारण कमला को ही समझता है। भाभी भी कान भरती है। अशोक बाबू उससे बच्चा भी छीन लेते हैं। कमला की जिन्दगी में अब कुछ न रहा वह आत्महत्या करने पर आमादा हो जाती है। लेकिन इन्सान जब खुशी से जी नहीं सकता तो मर कैसे सकता है। अपनी जान देने से पहले उसे एक अबोध बच्ची की जान बचानी पड़ती है। और जब वह उस बच्ची को लेकर उसकी माँ के पास आती है तो हैरान हो जाती है क्योंकि उस बच्ची की माँ, कमला की अस्मत बचानेवाली श्यामा होती है। श्यामा, बच्ची राधा को कमला के सुपुर्द कर हमेशा के लिये आँखें बन्द कर लेती है। कमला राधा की परवरिश करती है और उसकी अच्छी ज़िन्दगी बनाने के लिये जान तोड़ मेहनत करती है। उसे अच्छी तालीम देती है।
एक दिन जब कमला राधा के साथ उसकी कालेज देखने जाती है, सड़क पर मोहन की पाइन्ट कमला के पाँव से उड़े हुये कीचड़ के छींटे से खराब हो जाती है। मोहन गुस्से से उसे थप्पड़ मारता है। राधा मोहन पर बरस पड़ती है। अपने गुनाह की माफ़ी माँगने के लिए मोहन राधा को मिलता है। धीरे-धीरे दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठते हैं।
एक दिन जब मोहन राधा के लिए अच्छे कपड़े लेकर आता है और पार्टी में आने के लिए कहता है तो कमला उसे डाॅक्टर घर से निकाल देती है। लेकिन जब राधा से उसे पता लगता है ये अशोक बाबू का लड़का है तो कमला की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। वह जल्दी से राधा को सजाकर अशोक बाबू के घर तक छोड़ आती है।
पार्टी के बाद राधा को छोड़ने के लिए प्राण जाता है और वह अपने क्लब में ले जाता है। राधा, वहाँ श्यामा की फोटो देखती है ठीक वैसी ही फोटो उसके लाकेट में भी मिलती है।
इधर कमला को राधा और मोहन की फ़िकर होती है और वह राधा को मोहन से मिलने के लिये मना कर देती है। मोहन राधा को जीवन संगिनी बनाने का फैसला करके बाप से कहता है। अशोक बाबू राधा की माँ से खुद मिलने जाते हैं लेकिन वहाँ राधा की माँ की जगह मोहन की माँ को देखकर गुस्से से लाल हो उठते हैं। और कमला को जली कटी सुनाकर चले जाते हैं। आज राधा को पता लगता है कि कमला उसकी माँ नहीं है।
प्राण राधा को हासिल करने के लिए भाभी की मदद माँगता है। भाभी इन्कार कर देती है। और भाभी अपनी बदनामी से पहले अपने आपको खत्म करना चाहती है लेकिन अशोक बाबू उसे बचा लेते हैं। अशोक को भाभी से कमला की बेगुनाही का पता लगता है वह उससे मिलने के लिए जाते हैं।
प्राण का खून? कमला गिरफ्तार?
तो क्या कमला के दुःख का अन्त होता है?
क्या अशोक बाबू को अपनी बेगुनाह बीवी मिलती है?
इन सबका जवाब पाने के लिए सुभाष पिक्चरस प्रा.लि. का ’’बेदर्द जमाना क्या जाने’’ पिक्चर देखिये।