Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookदीवान जी ने मरहूम महाराज के हुक्म के मुताबिक़ बड़ी रानी को राजमाता का अधिकार देने के लिए दरबार तलब किया। छोटी रानी ने अपने भाई चन्द्रसेन से कहा, अगर बड़ी रानी को राजमाता का अधिकार मिल गया तो मेरी ज़िन्दगी दासियों की सी बनकर रह जायेगी। लिहाजा चन्द्रसेन ने अपने दस्तेराज़ बहादुर को मुकर्रर कर दिया कि वो दरबार की दरहम बरहम कर दे। बहादुर ने वही किया। लेकिन दीवान जी ने बड़ी रानी को राजमाता का अधिकार दे ही दिया- और ये ऐलान कर दिया कि जो राज के खि़लाफ आवाज़ उठायेगा उसे ख़त्म कर दिया जायेगा। चन्द्रसेन ने एक साधू से इल्तजा की आप मेरी बहन को राज का अधिकार दिलवा दीजिये। साधू ने उसे जन्नत महल में जाकर गुले मुराद हासिल करने को कहा और शत्र्त ये रखी कि गुले मुराद हासिल करने के लिए ग्यारह बेदाग़ यानी पाक़दामन लड़कियां जमा करके उनसे गुले मुराद की पूजा करानी होगी। एक फूल उसे देता है और कहता है कि तुम इस फूल की मदद से जिसको जिस आदमी की सूरत में तबदील करना चाहोगे वो हो जायेगा, लिहाजा चन्द्रसेन ने उस फूल की मदद से जंगली देवता का रूप लिया और जंगलियों को हुक्म दिया कि तुम ग्यारह बेदाग़ लड़कियों को लाओ। एक नौजवान बहादुर ज़िगारो ने फौरन कहा कि तुम देवता के रूप में शैतान मालूम होते हो हम तुम्हारा हुक्म मानने के लिए तैयार नहीं। चन्द्रसेन ने अपने दस्तेराज़ बहादुर को जिं़गारो का रूप देकर लड़कियां उठवानी शुरू कर दीं और कहा कि तुम बेफिक्र होकर अपना काम करो अगर पकड़े गये तो फांसी जिं़गारो को होगी। ये ख़बर सुनकर राजमाता ने जंगली डाकू को गिरफ्तार करने का ऐलान किया-लेकिन दीवान जी की लड़की किरन ने जंगली को गिरफ्तार करने का बीड़ा उठाया-लिहाजा एक जगह किरन और जिं़गारो का सामना हो गया-ज़िंगारो किरन को जंगली देवता के सामने ले गया और ये साबित कर दिया कि मैं जंगली डाकू नहीं। किरन और ज़िंगारो दोनों में प्यार हो जाता है और वो दोनों जंगली डाकू को गिरफ्तार करने में कामयाब हो जाते हैं लेकिन ये देखकर हैरान हो जाते हैं कि जंगली डाकू की शक्ल बिल्कुल ज़िंगारो की है। लेकिन चन्द्रसेन फूल की मदद से जंगली डाकू को जेल से रिहा करा देता है। और ये इल्ज़ाम दीवान जी पर लगता है कि किरन जंगली डाकू से मुहोब्बत करती है इसलिए राज को हथियाने के लिए दीवान जी ने ये सब किया। दो चार वाक़यात ऐसे होते हैं। राजमाता दीवान जी को क़ैद में डाल देती है, मौक़ा पाकर चन्द्रसेन किरन को उठवा लेता है और जन्नत महल में पहुंचाकर पूजा करवानी शुरू कर देता है- ज़िंगारो भी किरन को ढूँडते ढूँडते चन्द्रसेन के चुंगल में फंस जाता है। चन्द्रसेन किरन को मजबूर करता है कि वो ग्यारवां चिराग़ जलादे वरना ज़िंगारो को ख़त्म कर दिया जायेगा। अगर किरन चिराग़ जलाती है तो चन्द्रसेन कामयाब हो जाता है अगर नहीं तो उसकी मुहोब्बत का खात्मा हो जाता है। किरन ने कौन सा रास्ता अख्तियार किया ये आप पर्दा सीमी पे देखिये।
(From the official press booklet)