Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookअमल से जिन्दगी बनती है जन्नत भी जहन्नम भी!
यह ख़ाका अपनी फिदरत में न नूरी है न नारी है!!
हाजी मेडिकल लेब्रोट्रीज के मालिक हाजी जिआऊद्दीन एक फरिश्ता खल्सत इन्सान थे। अल्लाह ने उन्हें हर तरह नवाजा था। इज्जत, दौलत, शोहरत और सखावत में वह हातिम सानी थे। और उनका एकलौता बेटा यूसुफ माँ फरमा बददार सआदत मन्द और बाप का खिदमतगुजार, दस्ते रासत बेटा था, और अपनी बीवी सलमा से मोहब्बत करने वाला नेक शोहर भी था। घर जन्नत का नमूना था। लेकिन बुरी सोहबत, बुरे अमाल, जिन्दगी और खानदान को जहन्नम का नमूना बना देते है। यूसुफ का इंग्लेन्ड रिटर्न दोस्त नादिर की दोस्ती में यूसुफ बेदीन, दहरिया, लामजहब हो गया और खुदा, रसूल, बुजर्गान दीन, माँ-बाप का दुश्मन ऐसी ऐसी हरकते करने लगा, कि जमीन लरज गई, आसमान कांप गया। नादिर चालाकी से पहले यूसुफ के आधे कारोबार का हिस्सेदार बना, और फिर सब जायदाद का मालिक बनने के मनसुबे बनाम लगा। यूसुफ के खूबसूरत व खूब सीरत बीवी पर भी आजमाईश का वक्त था। अजीब इम्तिहान था, कि वह अभी तक मां नहीं बन सकी। नादिर के झूटे डाक्टर ने सलमा को ऐसी दवायें खिला दी कि जिससे सलमा बांझ हो जाये।
औलाद के न होने से यूसुफ गमगीन रहता था। नादिर ने एक साजिश की और अपनी पुर फेब अय्यार सेक्रेट्री शबाना की शादी यूसुफ से तय करा दी। औलाद के लिए यूसुफ दूसरी शादी पर भी अमादा हो गया। माँ-बाप ने हजरत ख्वाजा गरीब आप अल्लाह के मेहबूब बन्दे मेहबूब वली, सुलतानुलहिन्द है। आप अल्लाह से दुवा फरमायें कि बहू बेगम सलमा की गोद भर जाये, और अल्लाह का करम ऐसा ही हुआ। सलमा हामला हो गई। दुश्मन शबाना, नादिर, रादिर की फिरंगी बीवी जीना ने हमल गिराने के लिए सलमा को जहर दिया। बुजर्गों की दुआओं से वो जहर कोई और पी गया। कुरआन शरीफ की तलावत के दौरान बहुत खतरनाक जहरीला नाग छोड़ दिया। अल्लाह तेरी शान की सांप सलमा को डसने की बजाये कलाम पाक सुनकर झूमने लगा। और वापस जाकर दुश्मन नादिर के बच्चे को डस लिया। इस पर भी सुत्किर ला मजहब शैतान सफ्त दुश्मनों की आंखे नहीं खुली। और उन्होंने वह हालात पैदा कर दिये कि मां की मौत वाक्य हो जाती है। बाप घर छोड़कर चला जाता है। सूसुफ और सलमा का बेटा अनवर जो कि अपाहिज था। अपने दादा की लाश में भटकता रहा। नादिर ने यूसुफ को अन्धा कर दिया।
क्या यूसुफ की आंखों में रोशनी आई?
क्या अपाहिज अनवर अपने दादा से मिल सका?
क्या नेकी का बदला नेकी में इस दुनिया में ही मिलता है?
क्या बुरे काम अमाल का अन्जाम भी इस दुनिया में मिलता है?
नादिर का क्या हुआ?
क्या यह बरबाद खानदान आबाद हुआ?
ये हैरत अंग्रेज, अबरतनाक रूह परवर और इमान अफरोज वाक्यात परदा फिल्म पर मुलाहेजा फरमायें।
शमा-ऐ-वाहदत्त से पुरनूर, जिक-ऐ-मारफत से मामूर तसब्बूफ और तकद्दुम में डूबी हुई पाकिस्तान के आलमी शोहरत याफता कव्वाल साबरी ब्रादरान को पहली मरतबा परदा फिल्म पर देखिये और सुनिये।
(From the official press booklet)