Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookसोलजर दीपक जब लड़ाई से गांव लौटा तो उसकी आंखों में खून उतर आया क्योंकि उसके ज़ालिम और बेईमान चाचा ठाकुर ने उसकी मां और बहिन को खानदानी हवेली से बेदखल करके झोंपड़ी में रहने पर मजबूर कर दिया था, दीपक मां और बहिन को छोड़ कर चाचा से जवाब तलब करने गया, चाया और दीपक की बड़ी झड़प हुई और मामला पंचायत में जा पहुंचा, पंचायत में जिद्दी ठाकुर अकड़ गया, दीपक ने ठाकुर को चेतावनी दी अगर उसकी जायदाद उसे ना मिली तो खून खराबा हो जायगा। दीपक की चेतावनी हकीकत बन गई और दूसरे दिन सुबह खेत में लोगों को ठाकुर की लाश मिली। खून का इलज़ाम दीपक पर लगा। अदालत में झूटे गवाहों ने दीपक को मुजरिम साबित किया-
(1) क्या दीपक मुजरिम था?
(2) क्या दीपक कातिल था?
यह सब आप रजत पट पर देखिये।
(From the official press booklet)