Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebook"शाम घनशाम" एक ऐसी माँ की समर्पण की कहानी है जिससे यह पता चलता है कि इस दुनिया में माँ से बढ़कर और कोई रिश्ता नहीं है।
कलक्टर ठाकुर भीम सिंह (अमरीश पुरी) अपने ओहदे का नाजायज़ इस्तेमाल करके दौलत कमाते जाते हैं। भीम सिंह अपनी पत्नी कौशल्या देवी (रोहिणी हट्टंगड़ी) और अपने होनेवाले बच्चे के लिए जिन्हें वो बहुत चाहते हैं, के लिए दिन-रात 'दौलत-कमाई' के पीछे लगे हैं।
कलक्टर भीम सिंह के बढ़ते अत्याचार का पता सी.बी.आई. के ईमानदार आॅफिसर सत्यदेव सिंह (विक्रम गोखले) को पता चलता है, जो अपनी पत्नी गंगा देवी (राखी गुलज़ार) के साथ अभी-अभी तबादला लेकर आए हैं। (गंगा देवी माँ बनने वाली है।) इससे पहले कि सत्यदेव सिंह कलक्टर भीम सिंह को कानून की गिरफ्त में ले, ठाकुर भीम सिंह अपने ही हाथों से सत्यदेव सिंह को खत्म कर देता है। कौशल्या देवी के सामने हुए इस हादसे से वो अपने पति के कुकर्मों के लिए खुद को खत्म कर देती है।
गंगा देवी इस हादसे के बाद जुड़वा बच्चे को जन्म देती है। जिनका नाम 'शाम घनशाम' होता है। दूसरी तरफ ठाकुर भीम सिंह अपने साले चिंतामणि (गूफी पेंटल) के बेटे मौंटी (भूपेन्द्र सिंह) को गोद लेते हैं।
वक्त के साथ-साथ शाम (चन्द्रचूड़ सिंह) और घनशाम (अरबाज़ खान) बड़े होते हैं। कहते हैं 'होनी को कोई टाल नहीं सकता।' शाम-घनशाम का अंजाने में ही ठाकुर भीम सिंह के दत्तक पुत्र मौंटी से टकराव होता है, जिसमें मौंटी बुरी तरह ज़ख्मी हो जाता है।
मौंटी की हालत देखकर ठाकुर भीम सिंह खुद को रोक नहीं पाते हैं और 'शाम घनशाम' को खत्म करने के लिए गंगा देवी के घर जाते हैं, लेकिन इससे पहले की भीम सिंह कुछ करें, गंगा देवी से यह सुनकर कि 'शाम-घनशाम' में से एक ठाकुर भीम सिंह का अपना बेटा है, वे भौचक्के रह जाता है।
क्या 'शाम घनशाम' को पता चलता है कि वो दोनों सगे भाई नहीं हैं? क्या ठाकुर भीम सिंह गंगा देवी से अपना बेटा ले पाता है? ऐसे ही कई भावनात्मक सवालों से भरी है ये फिल्म "शाम घनशाम" - देखिए "शाम घनशाम"।
(From the official press booklet)