Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookकाली दुनिया का बेताज अजगर कोबरा कालेज में ड्रग्स सप्लाई करके कई नौजवान लड़के लड़कियों का जीवन बर्बाद करता है। उसके इस वहशी व्यापार का मोहरा श्याम है, जो ड्रग्स की लत लगा कर कई खूबसूरत लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाता है।
विनोद कालेज में पढ़ रहा है। प्रिंसीपल आलोक नाथ के कहने से वह श्याम के खिलाफ कार्यवाही कर उसे बेनकाब करने की कसम खाता है।
इधर प्रिंसीपल की भांजी रागिनी कालेज में आती है और पहली ही मुलाकात में विनोद रागिनी को दिल दे बैठता है। आँखों ही आँखों की बात होठों तक आ जाती है। प्यार की सरगम गूंजती है, दो जवां दिल धड़कते हैं और प्यार के पंख लिए गगन में उड़ान भरते हैं। लेकिन रूपा जो विनोद की क्लास मैट है उसे रागिनी का प्यार फूटी आँखों नहीं सुहाता क्योंकि वह विनोद को चाहती थी।
इधर श्याम अनैतिक कुकर्मों में उलझा रहता है। रानी नाम की लड़की की वह नंगी फिल्म उतारता है। ब्लैक मेल करता है और उसे लगातार हवस का शिकार बनाता है।
इधर रूपा रागिनी और विनोद को सबक सिखाने के लिए अजगर कोबरा का साथ देती है। श्याम रागिनी का अपहरण कर उसे भी अपनी हवस का शिकार बनाना चाहता है लेकिन विनोद कामयाब नहीं होने देता।
श्याम ने जो पाप अजगर कोबरा की छत्र छाया में किये थे उसका जवाब उसी अंदाज में मि. पीटर जो महिला आश्रम की अनुयायी है देती है। श्याम आश्रम में मि. पीटर का खून करने जाता है। क्योंकि ड्रग्स की तल से मि. पीटर युवकों को सावधान कर रही थी अजगर कोबरा का धंधा चैपट हो रहा था। खून करने से पहले श्याम मि. पीटर से अपनी हवस बुझाने के लिए कहता है मि. पीटर उसके साथ हम बिस्तर होने के बाद श्याम से कहती है उसे एड्स है अब तू भी मेरे साथ एड्स का शिकार हो गया है। श्याम को जब पता चलता है कि उसकी मृत्यु भी अटल है तो वह आग बबूला हो जाता है।
विनोद का माफिया के खिलाफ संग्राम रंग लाता है। खन्ना अपनी होने वाली बहू की नंगी असलियत आँखों से देख लेता है और रागिनी को अपनी बहू स्वीकार करता है। तभी एक बार फिर श्याम जिसको विनोद ने कानून की नजरों में गुनाहगार साबित कर दिया था हमला करता है और विवाह मंडप से रागिनी को उठा कर अपने अड्डे पर लाता है।
क्या विनोद अपनी रागिनी को श्याम के वहशी पंजों से छुड़ा सका?
क्या रूपा अपनी चाल में कामयाब हुई?
क्या अजगर कोबरा विनोद के संग्राम का मुकाबला कर सका?
क्या एड्स की शिकार युवतियों ने सही राह पर चलने का संकल्प किया?
इन सभी सवालों का जवाब पाने के लिए देखिए, ’खन्ना मूवीज’ की पहली भेंट- “मुझे गले लगा लो” देखना होगा।
[From the official press booklet]