Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookगायत्री:
मैं जब टीचर्स टेªनिंग का कोर्स पास करके अपने गाँव बसंपूर लौट रही थी तो टेªेन में मेरी कमल बाबू से मुलाक़ात हुई - हमें एक दूसरे से प्रेम हो गया - लेकिन जब मुझे पता चला कि कमल बाबू ज़मींदार साहब के लड़के हैं तो मैं बड़े संकट में पड़ गई - कमल बाबू ने मुझे ढ़ारस बँधायी - हम दोनों ने छुपकर पहाड़ी वाले मन्दिर में शादी कर ली - लेकिन भाग्य में जुदाई लिखी थी - कमल बाबू को सिंगापुर जाना पड़ा - सिर्फ किस्मत ही नहीं............
ज़मींदार रतनकुमार:
........मैं भी इस शादी के खिलाफ था - इस शादी से मेरे खानदान की इज्ज़त मिट्टी में मिल जाती - पहले तो मैंने गायत्री को डाँटा डपटा लेकिन जब वो न मानी तो मैंने झोली फैलाकर उस से अपनी इज्ज़त की भीख माँगी - मेरे एहसानों में दबी हुई निस्सहाय गायत्री ने मुझे कमल से न मिलने का और इस शादी को गुप्त रखने का वचन दे दिया - मेरे खानदान की इज्ज़त बच गई.........
नारायण:
.........लेकिन मेरी इज्ज़त मिट्टी में मिल गई - मेरी बेटी गायत्री एक बच्चे की माँ बनने वाली थी - लोक लाज के डर से मैं उसके बच्चे को पैदा होते ही अनाथ आश्रम में छोड़ आया, जो कि ज़मींदार साहब ने अनाथ बच्चों के लिये बनवाया था - मैंने गायत्री से झूठ बोल दिया कि उसका बच्चा पैदा होते ही मर गया - बेचारी गायत्री चीख उठी.........
कमल:
.......मैं भी चीख उठा, क्यूँकि सिंगापुर से लौटने पर मुझे गायत्री न मिली - सिर्फ उसकी पाप भरी कहानी सुनने को मिली - मेरे जीवन में कोई उत्साह न रहा - मुझे औरत ज़ात से नफ़रत हो गई मैं दुनिया से भाग जाना चाहता था - मैं अपने आपसे भाग जाना चाहता था लेकिन.............
श्याम:
"डूबते को तिनके का सहारा" - मेरे जैसे अनाथ के लिये भगवान ही माता-पिता थे - उन्हीं दिनों मेरे स्कूल में एक नई टीचर आई - वो मुझे बहुत प्यार करती थीं यहाँ तक कि वो मुझे अपने घर ले जाना चाहती थी लेकिन मैं अपने लँगड़े दोस्त भोला को अकेला छोड़कर न गया - छोटे ज़मींदार जी भी, जो कि मेरे स्कूल का सालाना जल्सा देखने आये थे मुझे बहुत प्यार करने लगे......मेरे दोस्त भोला ने कृष्ण कन्हैया के पास जाकर मुझे न सिर्फ़ एक माता और एक पिता भेजे बल्कि एक नाना और एक दादाजी भी भेज दिये..........
[From the official press booklet]