Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookअहंकार वो पौदा है, जिसे अगर पनपने से ना रोका जाये तो वो मनुष्य को असीम इच्छाओं का बन्दो बना देता है, और इच्छाओं को अगर ना रोका जाये तो मनुष्य सारे संसार को अपनी मुट्ठी में करना चाहेगा.
राजा महारुद्र की गिनती ऐसे ही मनुष्यों में से हैं. जब वो अपनी शक्ति से धर्मपुर पर विजय ना पा सका तो शैतान बेताल का सहारा लेकर उसने अपने सबसे बड़े दुश्मन महाराजा पुरुषोत्तम सिंह को डराकर धर्मपुर पर विजय पा ली और साथ ही धोखे से बेताल पर आघात किया. महारुद्र ने धर्मपुर पर तो विजय पा ली लेकिन महाराज का बेटा राजकुमार अजय उसके चंगुल से बच निकला.
छोटे-मोटे राजा महारुद्र के जुल्म का शिकार हो गये. वक्त बीता और जवान अजय ने एक मुरीले सिपाही का रूप धारण करके कई राजाओं को महारुद्र के जुल्म से छुड़ाया और एक दिन वो अपने माता-पिता के खून का बदला लेने के लिये धर्मपुर जा पहुँचा. वहाँ राजकुमार प्रताप और राजकुमारी माधुरी के बारे में मालूम हुआ. ये दो महारुद्र के विरूद्ध विद्रोह की तैयारी कर रहे थे लेकिन भैरव की चालबाजी से प्रताप पकड़ा गया. अगर वक्त पर अजय माधुरी और उसके साथियों को ना बचाता तो वो भी खतम हो जाये.
माधुरी ने अजय की बहादुरी और चालाकी का इस्तेमाल प्रताम को छुड़ाने के लिये किया. लेकिन जैसे ही अजय वहाँ से निकला माधुरी को सिपाही पकड़कर राजमजल ले गये. अजय ने माधुरी प्रताप और प्रताप की प्रेमिका पदि्मनी तो बच निकले लेकिन अजय और माधुरी पकड़ लिये गये।
प्रताप को पदि्मनी ने बताया कि महारुद्र अजय को कतल करके माधुरी से शादी करना चाहता है. प्रताप और पदि्मनी ने जान पर खेलकर महारुद्र के इस नापाक इरादे को नाकाम कर दिया- कैसे- महाशक्तिमान देखकर जानिये.
[From the official press booklet]