Released in 1986, Jaanbaaz remains one of the most stylish and ambitious films of 1980s Hindi cinema. Produced and directed by Feroz Khan, the film blended family drama, romance, action, and crime within a visually lavis...
View on Facebookभोला, नाम का भोला ही नहीं था बल्कि दिल का भी भोला था। बाप ने मरते वक्त वसियत की के बेटा शादी ज़रूर करना ताकि खानदान का नाम चले। भोला ने बाप की आखरी वसीयत को पल्ले बाँध लिया। भोला का दोस्त मख्खन दूसरे गांव में रहता था। मख्खन अपने गांव की एक लड़की शरबती से मुहब्बत करता था मगर शरबती का मामा गोविंन्दराम और उसका दोस्त पंदत रूलदूराम शरबती की शादी कहीं और तय करना चाहते थे। मख्खन एक दिन भोला से मिलने उसके गांव गया मख्खन ने भोला को नौजवान लड़कियों को अपनी तरफ मतवजा करने के कई तरीके बतलाये और उसे मेले में आने की दावत भी दे दी।
भोला ने मख्खन की सब हदायत पर अमल किया मगर शूमीये तकदीर के अपने ही गांव के नम्बरदार की लड़की से मज़ाक कर बैठा। बस फिर क्या था नम्बरदार ने भोला को गांव से बाहर निकाल दिया। उधर मख्खन अपनी शरबती को मेला दिखाने के लिये लाया। गोविन्दराम और रूलदूराम ने मख्खन का ताक्कुब किया और शरबती को मारपीट कर वापस ले गया। मामला गांव की पंचायत के रूबरू पेश हुआ और इस तरह मख्खन को भी गांव बदर कर दिया गया।
इतफ़ाक़ से भोला और मख्खन फिर शहर में मिल गये। मख्खन ने भोला से वायदा किया कि वो उसकी शादी कराने का जरूर बंदोबस्त करेगा मगर बदकिस्मती ने यहां भी साथ न छोड़ा। जहां गये वहां से धक्के मिले।
इधर शरबती के मामू ने पंडत रूलदूराम को शहर रवाना किया कि उसके लिये कोई अच्छा वर तलाश करें। खुश किस्मती से इस अरसे में मख्खन और भोला को खासी दौलत हाथ लग गई और दोनों ठाट से बंगले में रहने लगे मगर शादी की फिकर भोला को धून की तरह खाये जा रही थी।
पंडत रूलदूराम का एक रिश्तेदार शहर में शादी के दफ़तर का मॅनेजर था उसने शरबती की तसवीर उसे देदी और कोई अच्छा रहीस और मालदार लड़का फांसने को कहा।
मख्खन अमीर होने पर शरबती से मिलने गांव गया। उसकी ग़ैरहाज़री में भोला शादी के दफ़्तर में गया और शरबती की तसबीर देखकर उसे पसंद कर लिया। भोला और शरबती की सगाई हो गई मगर मख्खन को इस बात का बिलकुल इलम न हुआ-और फिर-उसके बाद के हलात परदाये स्क्रीन पर देखिये।
(From the official press booklet)