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युद्ध से लौटा हुवा वीर सिपाही शमशेरसिंह जब शांति हासिल करने घर आता है तो उसके दिलमें अपने गांव में खेतीबारी के कामों में कुछ सुधार करने के विचार पैदा होते हैं। उसको यह इरादा जब उसकी मां को मालूम होता है तो वह उसे पहले शादी कर घर बसाने को कहती है। और उसके एक निकट सम्बन्धी, दीनू चाचा के कहने सुनने से एक अंग्रेजी पढ़ी लिखी सभ्य लड़की नीला को शमशेर के लिए पसंद भी कर लिया गया। पर होना कुछ और ही था। ऐन शादी के मौके पर नीला गायब थी। वह शहर से एक सालीसीटर के फर्म के बुलावे पर चली गई थी। इधर शादी के अवसर पर जब नीला का पता न लगा तो शमशेर क्रुद्ध हो उठा। उसने शादी के मामले को आपने दिमाग से पूरी तरह से जुदा कर आपना सारा समय खेतीबारी के कामों में लगाने को निश्चय कर लिया। और इसी सिलसिले में वह टैªक्टर खरीदने के लिए शहर गया। इत्तफ़ाक से वह भी उसी जगह टिका जहां नीला रहती थी। नीला बेचारी अजब उलझन में पड़ी हुई थी। उसके सालीसीटरों ने उससे कहा- कि या तो आठ दिन के भीतर आपना जीवन-साथी चुन कर विवाह कर लो अन्यथा तीस लाख रुपयों की जायदाद से वंचित कर दी जाओगी। यह जायदाद उसके एक दूर के चाचा उसके नाम वसीयत में देगए थे। अब घटनाक्रम देखिये। शमशेर और नीला दोनों एक साथ एक ही जगह रहते हैं पर दोनों में से किसी को भी नहीं मालूम कि केवल कुछ दिनों पहले ही उनकी शादी होने जारही थी। नीला, जब सालीसीटरों द्वारा प्रस्तावित अनेक प्रेमियों में एक को भी न पसंद कर सकी तो उसने अंत में शमशेर को ही चुन लिया और यह रिश्ता सर्व साधारण में घोषित भी कर दिया गया। पर इतना होते हुए भी नीला के हृदय में एक भयानक उथल पुथल मची हुई थी। वह इस अचानक और अद्भूत रिश्ते के जाल से निकालना चाहने लगी। लेकिन शमशेर उसे नहीं छोड़ता। वह उसके हाथ पैर बांध कर जबर्दस्ती टैªक्टर पर बिठाकर आपने घर ले गया और एक पुरोहित की मदद से शादी कर ली। नीला किसी तरह भाग कर फिर शहर चली आई और आपने सालीसीटरों की सलाह से शमशेर पर अनाधिकार और बलात विवाह करने के आरोप लगा कर उससे दावा दायर कर दिया। उसकी फरियाद थी की शमशेर पागल है। उधर शमशेर ने भी देखा कि नीला वास्तव में उससे प्रेम नहीं करती तो उसने अदालत में सचमुच पागलपना करना शुरू कर दिया। इससे मुकदमे की सचाई ....... हो गई और नीला का आरोप अदालतने सही मान लिया.... प्रेम की रंगत देखिए।
शमशेर की इन हरकतों पर नीला मुग्ध हो गई और उसका दिल शमशेर को पाने के लिए मचलने लगा। उसने अनुभव किया कि वह शमशेर के बिना नहीं रह सकती। अंत में यह दिलचस्प कहानी यूं खत्म होती है कि नीला और शमशेर विवाह-सूत्र में बंध जाते हैं, और विवाह का वह रहस्य भी तभी प्रकट होता है जब दोनों एक दूेसरे के गले में वरमाला पहनाते हैं।